12 साल से लंबित Bajaj Pulsar और TVS Motor का झगड़ा निपटा; DTSi patent का अब कोई नहीं नामलेवा

TVS Motor ने मानहानि के लिए मांगे थे Rs 250 cr; कोर्ट के बाहर मामला सुलझाकर शिकवे किये दरकिनार

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Bajaj Pulsar with DTSi tech. Image for reference.

patent infringement cases का होना ऑटो इंडस्ट्री के लिए कोई नई बात नहीं है. इसी तर्ज पर Bajaj Auto व TVS के बीच का मामला भी लीगल प्रोफेशनल व ऑटो कम्पनियों के लिए एक केस स्टडी के रूप में सामने आया है. खास बात ये है कि ये मामला अंततः कोर्ट के बाहर ही सुलझ गया. 12 साल से चल रही कड़वाहट ख़त्म हो गई.

मामला 2007 में शुरू हुआ जब Bajaj ने TVS के खिलाफ patent infringement case फाइल करवाया. उन्होंने DTSi technology की कॉपी करने का आरोप लगाया. Bajaj का दावा था कि TVS अपनी 125cc Flame बाइक में उनकी DTSi technology का इस्तेमाल कर रहे हैं. TVS ने भी defamation का केस दर्ज करवा दिया. हर्जाने के रूप में Rs 250 crore की मांग की.

मामला Bombay High Court, Madras High Court व Intellectual Property Appellate Board (IPAB), चेन्नई में सालों तक लंबित रहा. कुछ मामले तो श्रीलंका व मेक्सिको तक में अधर में लटके रहे.

Bajaj DTSi dispute with TVS

वैसे Bajaj ने DTSi इंजन को in-house ही डवलप किया है. इसके इस्तेमाल से Pulsar की सेल्स में चार चाँद लग गये. इस तकनीक में  DTSi (Digital Twin Spark Ignition) द्वारा twin spark plugs का प्रयोग किया जाता है. इससे पॉवर आउटपुट और फ्यूल एफिशियेंसी बेहतर होती है. इस तकनीक को पहली बार Bajaj ने इस्तेमाल करके सफलता पाई.

Bajaj के इस दावे के जवाब में TVS का कहना है कि Flame बाइक को उन्होंने Austria based AVL के साथ मिलकर डवलप किया है. इस इंजन के तीनों वाल्व Bajaj के दोनों वाल्व से अलग है. Bajaj ने इस दावे को ख़ारिज करते हुए तीसरे वाल्व को इंजन क्वालिटी बढ़ाने में अप्रभावी बताया.

अब जाकर दोनों कम्पनियों ने शेयरहोल्डर्स, कस्टमर्स व दूसरे स्टेकहोल्डर्स को विवाद खत्म होने की सूचना दी है. दोनों ने प्रेस रिलीज जारी करके 31 अक्टूबर से “Settlement Agreement” द्वारा विवाद के खत्म होने की घोषणा की. इस तरह सभी प्रकार के मुआवजे व पेनल्टी की मांग भी रद्द हो गई.

वैसे विशेषज्ञों का मानना है कि BS-VI norms के आने से इस विवाद का अंत हुआ है. इसमें अब DTSi tech को पुराना माना जा रहा है तो दोनों ही कम्पनियों को लगा कि पुरानी तकनीक के लिए झगड़ना अब बेकार है.