चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस का दावा – BMW की रैश ड्राइविंग ने किये एक्सीडेंट्स ज्यादा

BMW कार्स की स्पीड है जानलेवा - BMW India को कुछ तो करना ही होगा

Image – Chandigarh Traffic Police / Facebook

एक्सीडेंट्स होना रुकता नहीं और इसके अजीबोगरीब कारण गिनाये जाते हैं. कभी-कभी ऐसे कई कारण गले ही नहीं उतरते. अक्सर बड़े एक्सीडेंट्स के लिए बड़ी कार्स को जिम्मेवार ठहराया जाता है. अब आम आदमी ऐसी बातें करें तो परवाह नहीं लेकिन जब पुलिस ऐसे आरोप लगाये तो स्थिति विकट हो जाती है.

वैसे अक्सर हुई है ऐसी घटनायें जब किसी शानदार गाड़ी में बेहिसाब पीकर, किसी बिगड़े रईस की अनियंत्रित स्पीड ने मासूमों की जान ली है. लेकिन ये तो नहीं कह सकते कि एक्सीडेंट्स होने का यही एक तरीका है.

भारत में 2018 में 1.51 lakh लोगों ने सड़क दुर्घटना में अपनी जान गवाई. हाल ही में चड़ीगढ़ पुलिस द्वारा फेसबुक के माध्यम से BMW India तक पहुँचाया गया खुला ख़त BMW व साइकिल के बीच हुई दुर्घटना बयां करता है. इस दुर्घटना में 17 वर्षीय साइकिल सवार की दर्दनाक मौत व पीछे सवार का गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होना; कार की स्पीड पर सवालिया निशान लगाता है.

Chandigarh Traffic Police blames BMW India

पर यहाँ उलझे हुए दो पेंच सामने आते हैं. क्या स्पीडिंग कार दुर्घटना का इकलौता कारण है या कार की लेन में साइकिल का होना जिम्मेवार है. अगर स्पीड की बात को अलग रख दें तो क्या व्हीकल्स का एक ही लेन में होना तर्कसंगत है क्या??

अब अगर मैनपॉवर से चलने वाली साइकिल और हॉर्सपावर से चलने वाली कार टकरायेगी तो अंजाम तो घातक ही होगा. तिस पर कार की स्पीड बेहद ज्यादा हो. खराबी रोड के फंक्शन में ही थी. या तो BMW स्लो लेन में थी या साइकिल फ़ास्ट लेन में थी. इस गलती को नजरंदाज किया गया है. Visibility भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकती है.

हममें से ज्यादातर लोग तुरंत जज करते हैं, कमेंट करते है और पुलिस के आने का इंतजार किये बिना अपनी ही राय देते हैं. मेडिकल हेल्प का तुरंत इंतजाम न होना भी एक बड़ी गलती है. PCR van के आने से पहले एक्सीडेंट साईट से छेड़छाड़ भी एक बड़ी भूल है.

चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस का मानना है कि इस विशेष ब्रांड के व्हीकल की वजह से rash driving होती है. इस पर काबू पाना जरूरी है. उन्होंने खुले तौर पर BMW drivers पर रैश होने का आरोप लगाया है. मेन्युफेक्चरर्स कैसे रैश ड्राइविंग रोक सकते है; इस बारे में इनका स्टेटमेंट आप Facebook पर पढ़ सकते है.

अगर रैश ड्राइविंग को आईडेंटीफाई किया जाता है तो क्या ये ‘non-issue’ है? इस पर कार्यवाही नहीं होनी चाहिये? क्या स्ट्रीट कैमरा बिल्कुल असरहीन है जो किसी भी लापरवाह ड्राईवर को इनकी परवाह नहीं है. क्या उन्हें फाइन से कोई डर नहीं है? क्या स्पीड एक्सीडेंट्स के लिए जिम्मेदार नहीं है? सवाल बहुतेरे है और जवाब का इंतजार है.