कैंसरग्रस्त biker ने Muktinath मंदिर तक बाइक से सफर तयकर लिखी नई इबारत

Subhojit Dutta ने दिखा दिया कि विल पॉवर के सहारे वो अपनी पैशन को जी रहे हैं.

हौंसले और हिम्मत से हर जंग जीती जा सकती है. आपने ऐसी बातें बहुत बार पढ़ी-सुनी होगी पर इसे साकार कर दिखाया है कोलकाता निवासी सुभोजित दत्ता ने. आइये उन्हीं की जुबानी सुनतें हैं उनकी दास्तां. 30 वर्षीय दत्ता अपनी प्राइवेट सेक्टर की जॉब, अपनी पत्नी, Duo Motorcycle Touring की पैशन के साथ पूर्ण संतुष्टि का जीवन जी रहे थे.

उन्हें आँखों के आगे अंधेरा तब महसूस हुआ जब नवंबर 2016 में ये पता चला कि उन्हें Leukemia है. वे अपनी बाइक पर भारत के कुछ स्थान घूम चुके थे पर अभी तो बहुत कुछ घूमना बाकी था. पर इस तरह के एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए तो पूर्ण स्वस्थ होना जरूरी है. एक बार निराशा ने धर दबोचा कि अब उनकी ये पैशन अधूरी ही रह जायेगी.

C S Lewis की एक quote ने उनकी जिंदगी में नया जोश और ऊर्जा भर दी. उन्होंने लिखा था- “आप अतीत में जाकर अपना भाग्य तो नहीं बदल सकते पर जहाँ हो वहीँ से नई शुरुआत करके अपना भाग्य खुद लिख सकते हो.”

बस फिर क्या था. दत्ता ने अपने अंदर के उस फाइटर को जगाया. मोटिवेशनल थॉट और आर्टिकल्स को पढ़ा, समझा और जीवन में उतार लिया. दो साल तक उन्होंने मेडिकल ट्रीटमेंट तो लिया ही साथ ही गुडविल और फेथ भी महसूस करते रहे. उम्मीद और पाजिटिविटी रंग लाई. नतीजा सुनकर तो आप भी उनके जज्बे को सलाम करेंगे.

एक साल पहले वो अपनी बीवी को लेकर हिमालय की Rough & Tough terrain में निकल पड़े और इस टूर का जमकर मजा लिया. तब उन्हें यकीन हो गया कि उनकी क्षमता उनके मन की शक्ति पर निर्भर है. हर व्यक्ति की तरह वे भी adventure sport का भरपूर आनंद ले सकते हैं. इसी इरादे को कामयाब करने पिछले ही महीने वे नेपाल के Lower Mustang की ओर निकल पड़े.

मात्र 28 साल की उम्र में कैंसर जैसी बीमारी से जूझते हुए इस passionate motorcycle rider ने एक नया इतिहास लिख दिया. 2500 Km बाइक चलाते हुए country border पार करते हुए Muktinath Temple (12172 ft) पहुँचने वाले वे देश के पहले कैंसर पेशेंट है.

उन्होंने उन सब बातों को झुठला दिया कि Adventure sport sके लिए शानदार fitness और strength जरूरी है. दो साल तक दवाइयों के साथ खुद को ये खुराक दी कि positivity और will power से नई इबारतें लिखी जा सकती हैं.

21 अक्टूबर 2018 का दिन उनके लिए मील का पत्थर साबित हुआ. इसी दिन उन्होंने अपनी पत्नी के साथ कोलकाता से नेपाल की Mustang Valley के Muktinath के लिए बाइक द्वारा यात्रा शुरू की. वे Raxaul-Birganj International Border होते हुए नेपाल पहुँचे. नेपाल की valley, jungles & mountains से गुजरना एक करिश्माई अनुभव रहा. Beni तक रोड कंडीशन भी शानदार थी. उसके बाद की pavedरोड gravel, sludge और rock से भरी हुई थी.

एक ओर Kali Gandaki river और दूसरी ओर snow capped peak का नजारा उन्हें आनंदित कर रहा था. रास्ते भर जगह-जगह छोटी, खूबसूरत hamlets मिलती रही जहाँ वे दोनों चाय-नाश्ते और खाने के लिए रुकते. कभी-कभी तो वहां रात को भी रुकते. Dusty roads, dry river bed, snowy peaks-सब कुछ बेहद आकर्षक और लुभावने लग रहे थे. Left us awestruck. Jomsom और Kagbeni पार करते हीUpper Mustang valley आने के संकेत मिलने लगे. दत्ता के शब्दों में, “इस ट्रिप ने मेरा खोया आत्मविश्वास लौटा दिया. मंदिर पहुँचते ही माइंड और सोल एक अलग ही शांति का अनुभव करने लगे.

कैंसर के साथ जूझना जब संघर्षमय लग रहा था तो इस ride ने मुझे अहसास करवाया कि मैं तो पूरी तरह से स्वस्थ हूँ. अपने comfort zone से बाहर निकलकर किसी अनजान जगह पर जाना चैलेंजिंग होने के साथ ही मुझे मेरी क्षमताओं पर विश्वास करना सिखा गया. हर समय खुद के साथ होने का और अपनी शांति बरकरार रखने का सबक मुझे इसी ट्रिप ने सिखाया. तमाम खूबसूरती को अपनी यादों में सहेजकर 2 नवम्बर को हम कोलकाता लौट आये. ये आज तक की सबसे शानदार ट्रिप रही!