हेलमेट न पहनने का टशन क्या जान से ज्यादा है? कौन समझायें इन सिरफिरों को

रोड सेफ्टी पर गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट.

किसी को रास्ता जरूर दिखाया जा सकता है पर जरूरी तो नहीं कि सबको मंजिल तक भी कोई दूसरा ही ले जाये. अपनी सुरक्षा व्यक्ति की खुद की जिम्मेदारी है. और इसके लिए उसे खुद को ही जागरूक होना होगा. भारत में ऐसे चित्र विचित्र लोग रहते हैं जो असुविधाजनक करार देते हुए हेलमेट को खुद से दूर रखते हैं.

कई रिपोर्ट्स से ये खुलासा तो हो चुका है कि हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा उपकरण भले ही जान न बचा पाये पर पर आपको गंभीर दुर्घटनाओं से बचाये रखते हैं. 2017 के ये आंकडें आपके रौंगटे खड़े कर देंगे. 48,746 दो पहिया सवारों ने सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवाई उनमें से 73.8 पर्सेंट लोगों ने हेलमेट नहीं पहना था.

रोड एक्सीडेंट्स में जिन 26,896 लोगों ने जान गंवाई उन्होंने सीटबेल्ट का इस्तेमाल नहीं किया हुआ था. हालाँकि सीटबेल्ट के इस्तेमाल के बावजूद भी 12,206 लोगों की जान चली गई. 2017 की 72.1 परसेंट दुर्घटनाओं में 18-45 साल की आयु के लोग शामिल थे. 4.64 लाख दुर्घटनाएं घटी जिसमें 1.47 लाख लोगों ने अपनी बेशकीमती जान गंवाई.

8 से 60 साल की आयु वाले 87.2 परसेंट लोग दुर्घटनाग्रस्त हुए. नेशनल हाईवे पर घटने वाली दुर्घटनाओं का प्रतिशत 30.4 था और उनमें से मृतकों की संख्या 36 percent (53,181) रही. सामान्य सड़कों पर दुर्घटनाओं में मृतक संख्या 54,920 (37.1%) रही.

2017 में देशभर में 4,64,910 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई जिनमें से 1,41,466 अर्थात 30.4 परसेंट नेशनल हाईवे पर घटित हुई. 1,16,158 (25.0 percent) दुर्घनाओं की सूचना Expressways और State Highways (SH) से और 2,07,286 (44.6%) अन्य सड़कों पर घटित हुई.

2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार 98 लोग रोज सड़क दुर्घटना में जान गंवाते हैं. 79 कार सवार रोजाना सीटबेल्ट न पहनने के कारण मारे जाते हैं. लगभग 9 लोग फोन पर बात करते हुए दुर्घटना में मारे जाते हैं.

जितनी भी दुर्घटनाएं दर्ज हुई उनमें से 79.9 परसेंट के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था. 2.6 परसेंट लोगों के लाइसेंस रिकॉर्ड का कोई अता पता नहीं था. 7.1 परसेंट लोगों के पास learner’s licence और 10.4 percent लोगों के पास वैध लाइसेंस नहीं था. इस विषयक पूरी रिपोर्ट आप नीचे पढ़ सकते है.