Hero Splendor electric लोकल मैकेनिक ने की तैयार; लागत आई Rs 10 हजार

नीम हकीम खतरा-ए-जान; सेफ्टी के मामले में समझौता न करें

टूवीलर्स की इलेक्ट्रिक रेंज का मार्केट में प्रवेश; वर्तमान फ्यूल बाइक्स व स्कूटर्स के लिए खतरे की घंटी है. ये कितने समय में नदारद होंगे – ये देखने वाली बात होगी.

अगर गवर्नमेंट का रुझान इसी तरह से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने में लगा रहा तो वो दिन दूर नहीं जब भारतीय सडकों से sub-150 cc टू वीलर्स गायब हो जायेंगे. लेकिन इतना होने के बाद भी अभी इस्तेमाल हो रहे IC engined टू वीलर्स काफी संख्या में बचे रहेंगे. तो उनका क्या होगा?

हिसार, हरियाणा के एक मैकेनिक की होशियारी कहें या जुगाड़ कि उसने एक समाधान निकाला है. उसने conventional commuter motorcycle ली और उसका पेट्रोल इंजन हटाकर वहां एक बैटरी लगा दी. भारतवासी वैसे भी जुगाड़ के लिए प्रसिद्ध है. आप इस installation का विस्तृत वीडियो नीचे देख सकते हैं.

इस शख्स ने इस मोडिफिकेशन के लिए BLDC motor का इस्तेमाल किया है जिसमें स्पीड कंट्रोलर लगा हुआ है. deep discharge battery का प्रयोग होने से किसी तरह के ब्लास्ट या fire hazard का खतरा नहीं है. हालाँकि वृहद जानकारी उपलब्ध नहीं हुई है पर हम देख सकते हैं कि ये सारा सिस्टम काफी साधारण है. इसमें कोई dedicated power electronics module नजर नहीं आ रहा है तो ये आभास मिलता है कि ये एक साधारण DC motor है जो बैटरी द्वारा संचालित है. मोटर गियरबॉक्स के बिना  sprocket को सीधे ही ड्राइव करती है.

ध्यान से देखने पर भी हमें इसमें चार्जिंग के लिए सॉकेट में बैटरी प्लग करने का कोई विकल्प नजर नहीं आया. ऐसा लग रहा है कि इस बैटरी को वैसे ही रीचार्ज किया जाता है जैसे डेड व्हीकल की बैटरी को रीचार्ज किया जाता है. इस प्रक्रिया में डिस्टिल वाटर के इस्तेमाल से नेगेटिव व पॉजिटिव टर्मिनल्स को क्लिप द्वारा कनेक्ट किया जाता है.

इलेक्ट्रिक बाइक बनाने में Hero Splendor का इस्तेमाल काफी कठिन लग रहा है. एक सफल EV के लिए ट्रक बैटरी भी ज्यादा उपयुक्त नहीं होगी. garage build रूप में ये मॉडिफाइड बाइक भले ही अच्छी लगे पर इसकी सफलता संदिग्ध है.

मैकेनिक ने बैटरी को फिट करने के लिए इंजन को हटाकर tubular frame को मॉडिफाई किया है. ये कहा नही जा सकता कि इस मोडिफिकेशन के बाद चैसिस की स्ट्रेंथ क्या रहेगी. e-kit व बैटरी का खर्च मिलाकर इस मोडिफिकेशन में कुल Rs 7,000 का खर्च आया है.

इस इलेक्ट्रिक मोटर से इसकी स्पीड बुरी तरह प्रभावित हुई है. बैटरी के loaded होने से ये अपनी निश्चित स्पीड को पार करके आग पकड़ सकती है और इसमें विस्फोट होने का खतरा भी काफी है. इसलिए बेहतर यही होगा कि ठीक तरह से डिजाईन की हुई बैटरी, संबंधित power electronics व बखूबी डिजाईन किया हुआ battery management system ही काम में लिया जाये.

वैसे इस सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि आगामी समय में बाजार में retrofit EV kits की विस्तृत श्रृंखला मिलेगी. उम्मीद है गवर्नमेंट इस तरह के जुगाड़ को प्रतिबंधित करके केवल अप्रूव्ड वेंडर्स व फिटर्स को ही powertrain swap बनाने की अनुमति देगी.