High power headlight बनी जानलेवा; ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने हटवाया

जिन्होंने हटाने से किया इंकार, उन्हें भुगतने होंगे गंभीर परिणाम.

जिस तरह से लोग मॉडिफाई व्हीकल्स के लिये दीवाने हो रहे हैं वैसे ही aftermarket High-Intensity Discharge (HIDs) लैम्प्स का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. पर इसका सबसे बड़ा नुकसान है कि एक्सीडेंट्स के केस दिन दुगुने रात चौगुने बढ़ रहे हैं. केरल के मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट ने इनके खिलाफ कड़े कदम उठाने का निश्चय किया है.

उन्होंने 31 जनवरी, 2019 की डेडलाइन तय कर दी है. इसके बाद भी जो ओनर्स aftermarket HIDs नहीं हटायेंगे उनके विरुद्ध show-cause नोटिस जारी किया जायेगा. इसके बाद भी लाइट्स नहीं हटाई जाये तो ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट कठोर कदम उठाएगा. जिसमें रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द करने से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस जब्त करना तक शामिल है. केरल के ट्रैफिक कमिश्नर, के. पदमकुमार के अनुसार एक्सीडेंट की कारण बनी इन लाइट्स पर अंकुश जरूरी है.

केरल में HIDs के बैन होते ही सुप्रीम कोर्ट ने व्हीकल मॉडिफिकेशन को भी अवैध घोषित कर दिया है. इन ओनर्स ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तीखी आलोचना की है. Aftermarket HIDs की सबसे बड़ी समस्या ये है कि इन्हें प्रोपरली सेट अप नहीं किया जाता है. जिससे ये सामने से आने वाले लोगों की आँखों को चौंधियाँ देते हैं. ऐसा नहीं है कि कार मैन्युफेक्चरर्स HIDs का इस्तेमाल नहीं करते पर ये अच्छी तरह से इनस्टॉल की हुई होती है. इनमें लगे projector lamps रोड पर फोकस करते हैं न कि दूसरी लेन के ट्रैफिक पर.

कड़ी कार्यवाही करने के उद्देश्य से ऑफिशियल्स को lux meters भी दिए गए हैं जिससे वो हेडलैंप से आने वाली लाइट की इंटेंसिटी को माप सकें. इसके लिए ऑफिसर्स को ट्रेनिंग भी दी गई ताकि वे भली प्रकार से रीडिंग ले सके. रात के समय पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है ताकि वे नियम तोड़ने वालों की धर पकड़ कर सके. जिन वाहनों के बोनट पर auxiliary lamps लगे हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. ये भी अवैध है और सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल नहीं किये जा सकते हैं. ये केवल off-roading के लिए मान्य है. उम्मीद है कि केरल पुलिस की तर्ज पर दूसरे राज्य भी कठोर निर्णय लेंगे.