इस बार Honda Activa dealer चढ़ा हत्थे; रजिस्ट्रेशन बिना स्कूटर बेचने पर Rs 1 lakh का फाइन चढ़ा मत्थे

RTO ने लगाई फरियाद; इस Honda dealer का रद्द हो लाइसेंस

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एक बार फिर से new Honda Activa पर नये MV Act की मार पड़ी है पर इस बार शिकार गाड़ी का ओनर नहीं बल्कि डीलर है. घटना उड़ीसा की है. अब आपको हैरत ये हो रही होगी कि उड़ीसा स्टेट गवर्नमेंट ने कुछ दिन पहले ही तो ये कहा था कि तीन महीने तक ये नये रूल्स लागू नहीं होंगे. पहले वे इसके प्रति लोगों में चेतना लाने का काम करेंगे जिससे सभी भली प्रकार अपने डाक्यूमेंट्स तैयार कर लें. फिर ऐसे में ट्रैफिक पुलिसमैन द्वारा Rs 1 lakh का फाइन काफी धमाकेदार बात है.

अब हम आपको ये भी बता दें कि अपराध की प्रकृति जानें बिना हम किसी को भी दोष नहीं दे सकते हैं. वाकया कुछ यूँ है कि ये नई Activa 28 अगस्त को भुवनेश्वर में खरीदी गई थी. इसे कटक के बेरंग एरिया में अधिकारियों द्वारा रूटीन चेकिंग के लिए रोक लिया गया.

अधिकारियों को पता लगा कि ये स्कूटर तो बिना रजिस्ट्रेशन नंबर का है. इसे गंभीर अपराध मानते हुए स्कूटर को सीज करने के अलावा डीलर पर Rs 1 lakh का जुर्माना भी लगाया गया. ये प्रोविजन अमेंडेड MV Act में वर्णित है.

RTO officials ने तो डीलरशिप का लाइसेंस रद्द करने की मांग भी की. ये बात तो पुराने MV Act में भी है कि कस्टमर को वाहन की डिलीवरी देने से पहले डीलरशिप सभी डाक्यूमेंट्स पूरे देवें.

इन डाक्यूमेंट्स में इंश्योरेंस, रजिस्ट्रेशन नंबर व पोल्यूशन सर्टिफिकेट तो कस्टमर को डिलीवरी से पहले ही दे दिये जाने चाहिये. इन मामले में इन सब जरूरी बातों को डीलरशिप द्वारा दरकिनार कर दिया गया. कस्टमर को बिना किसी सर्टिफिकेट के व्हीकल थमा देना तो गंभीर अपराध है.

हालाँकि ये बात अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है कि कितना फाइन डीलर को भरना है और कितना कस्टमर को! वैसे Rs 1 lakh में तो दो Activa खरीदी जा सकती है.

अभी तक डीलरशिप्स उन Trade Certificates का दुरूपयोग कर रही थी जो केवल व्हीकल के इन्टर्नल ट्रांसपोर्टेशन के लिए इश्यू किये गये थे. कस्टमर्स को डिलीवर किये गये व्हीकल में इनका कोई यूज नहीं है. कस्टमर्स को डिलीवर किये जाने वाले सभी नये व्हीकल्स को परमानेंट या टेम्पररी रजिस्ट्रेशन नंबर तो दिया ही जाना चाहिये.

रजिस्ट्रेशन नंबर लेना तो चुटकियों का काम है. पता नहीं क्यों डीलर्स इस बाबत नियम तोड़ते हैं. शायद इसे ही कहते हैं – ‘चोर चोरी से जाये सीनाजोरी से न जाये’.