छंट ही नहीं रहे Jawa पर छाये आशंका के बादल – कहीं खो न दें कंपनी कस्टमर्स का स्नेह?

डीलर्स हैरान; कस्टमर्स परेशान; कब आयेगा डिलीवरी वाला दिन वो खास?

कहते हैं ‘एक चुप्पी सौ पर भारी’. पर Jawa की अपनी बाइक्स की डिलीवरी के बारे में साधी गई चुप्पी अब रहस्यमय लगने लगी है और सभी को स्पष्टीकरण की दरकार है. ये चुप्पी इस हद तक भारी पड़ रही है कि लोग कमेंट कर रहे हैं; कयास लगा रहे हैं और बुकिंग तक कैंसिल करवा रहे हैं. अब तो चाहे ट्वीट देखो या  Facebook व Instagram पर कमेंट्स; सर्वत्र आलोचना का दौर जारी है. इल्जामों का दौर इतने चरम पर पहुँच गया है कि कुछ लोगों ने तो यहाँ तक लिख दिया है कि अपनी ब्रांडिंग के लिये Jawa PR agency/pre agreed posting guidelines का फेक उपयोग कर रहे हैं. बाइक तो डिलीवर करते नहीं और सपने बड़े देखते हैं.

अब आप में से कई लोग इसे डीलरशिप प्रॉब्लम कहकर पल्ला झाड़ सकते हैं पर सच्चाई ये नहीं है. डीलर्स के पास कोई जवाब नहीं है. अहमदाबाद के डीलर से जब डिलीवरी के बाबत पूछा गया और वो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका तो कई बुकिंग कैंसिल करवा दी गई. पहले लगा कि हो सकता है कि गुजरात की डीलरशिप पर ही डिलीवरी नहीं हो रही है पर ये मात्र भ्रम निकला.

देशभर में चाहे tier 1, tier 2 या tier 3 हो; सभी जगह यही हाल है. बेकसूर होते हुए भी डीलर्स को सजायाफ्ता होने का अहसास हो रहा है. नये ब्रांड पर जोश में आकर इन्वेस्ट तो कर दिया पर यूनिट्स डिस्पैच का कोई अता-पता नहीं है. बैंगलोर जैसे शहर में भी इसकी यूनिट्स नहीं दिख रही है जहाँ आला दर्जे की बाइक्स भी आसानी से बिकती है.

कस्टमर्स के सब्र का प्याला छलकने लगा है. जिस तूफानी गति से लोगों ने Jawa को सिर-आँखों पर बैठाया है उसी गति से उतार भी सकते हैं. इसलिए अब समय आ गया है कि Jawa को वास्तविक समस्या का खुलासा कर देना चाहिये. अब वो 1993 वाला युग तो गया जब Priya scooter या Padmini के लिये आपकों साल भर इंतजार करना पड़ता था. एक से एक उम्दा ब्रांड मार्केट में हैं. अब तो सोशल मीडिया का जमाना है जहाँ बात हवा की गति से फैलती है और दिग्गजों को भी मिनटों में उखाड़ फेंकती है.

हैं कुछ लोग जो सूंघकर समस्या का पता लगा लेते हैं. उनका मानना है कि Jawa (Mahindra) वेंडर्स के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं. शायद वेंडर्स अच्छी क्वालिटी के पार्ट्स सप्लाई नहीं कर रहे हैं या इस सप्लाई को ओवरएस्टीमेट किया गया है. अब समस्या वेंडर व मेन्युफेक्चरर के बीच है और भुगत रहे हैं कस्टमर्स जिन्हें पूरी बात तक जानने का अधिकार नहीं है. क्योंकि जब ARAI ने इस बाइक को सभी सर्टिफिकेशन दे दिये हैं तो भारत में इसकी बिक्री वैध है; फिर क्या बात हो सकती है?

कुछ लोग तो इसकी तुलना Freedom 251 scam से भी कर रहे हैं. मात्र इने-गिने लोगों को डिलीवरी के लिये कॉल आया है; बाकी लोग तो बस पूछ रहे हैं, “मेरा नंबर कब आयेगा?”

हाँ हो सकता है इस ब्रांड के कुछ दीवाने लम्बा इंतजार कर भी लें पर mass market से ये उम्मीद बेमानी है. अगर एकबार लोगों का विश्वास उठ गया तो फिर से ब्रांड वेल्यू जमाने में पसीने आ जायेंगे. Tata के Indica days तो सभी को याद ही हैं कि कैसे डिक्लाइन के बाद ये कंपनी एड़ी-चोटी का जोर लगाकर फिर से वो मुकाम हासिल कर पाई.

एक सच हजार परदों से बेहतर होता है – इसे ध्यान में रखते हुए कंपनी को सच का खुलासा कर ही देना चाहिये. कहीं ऐसा न हो कि एक शानदार बाइक इन गलतियों की वजह से Fiat जैसे बुरे दिन देखें.