डीजल कार्स को विदा करके Maruti नहीं है परेशान; ढूंढ लिया तोड़; कमायेंगे बेजोड़

Vitara Brezza व S-Cross जैसे डीजल इंजन्स होंगे स्मार्ट हाइब्रिड तकनीक से लैस; फ्यूल एफिशियेंसी होगी बेजोड़

Ciaz है वो Maruti की इकलौती कार जिसे मिला है 1.5 liter डीजल मिल का उपहार.

फ़िलहाल तो ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में Maruti Suzuki India Ltd. द्वारा अप्रैल 2020 से डीजल इंजन के डिसकंटीन्यू किये जाने की खबर छाई हुई है. ये तो वही बात हुई कि बड़े जतन से आप कोई पौधा लगाओ, उससे फल की उम्मीद लगाओ और कुछ ही दिनों में खुद ही उसे उखाड़ फेंकों. पर दाद देनी होगी कंपनी के जज्बे को!! जब सभी उन्हें होने वाले नुकसान का अनुमान लगा रहे हैं, वे इस विषय में बिल्कुल चिंतित नहीं हैं.

अभी कुछ समय पहले ही तो भारी निवेश करके कंपनी ने 1.5-liter डीजल इंजन लाँन्च किया था. 2018 में Maruti की डीजल इंजन्स से हुई सेल्स 23% थी. ऐसे में इतना बड़ा निर्णय लेना कोई मामूली बात नहीं है. Maruti Suzuki India Ltd. के CFO, अजय सेठ ने नुकसान की बात नकारते हुए ये स्पष्ट किया कि जब डीजल इंजन प्रोडक्शन की 99% क्षमता पेट्रोल, CNG व अन्य की ओर केन्द्रित हो जाएगी तो नुकसान होना तो दीगर बात है.

वैसे आपकी जानकारी के लिये फिर से बता दें कि Maruti ने 1.5-liter डीजल इंजन प्रोजेक्ट पर Rs 1,000 crore का निवेश किया था पर भारतीय गवर्नमेंट में BS4 emission norms से सीधे ही BS6 लागू कर दिया तो कंपनी को ऐसा सख्त निर्णय लेना जरूरी हो गया.

पिछले महीने ही तो ये नया 1.5 liter डीजल इंजन हमसे रूबरू हुआ है. आपको ये जरूर लग रहा होगा कि इसे विदा करने से बेहतर होता कंपनी इसे ही BS-VI standards strigent करने का निर्णय लेती. पर इससे बजट बहुत ज्यादा बढ़ जाता. इस प्रक्रिया में particulate filters, more sophisticated catalytic converters, बहुत से कम्पोनेंट्स की रीडिजाईन व EGR (Exhaust Gas Re-circulation) जैसे सब-सिस्टम भी मैनेज करने पड़ते.

और इन सब खर्चों का भार कस्टमर्स पर आता. उन्हें डीजल इंजन वाले मॉडल्स खरीदना महंगा पड़ता. स्माल कार सेगमेंट में Maruti पारंगत है और वहीँ उनकी कीमत बढ़ने से सेल्स प्रभावित होने की आशंका रहती. इतनी रिस्क लेने से तो बेहतर है कि Maruti CNG, हाइब्रिड व इलेक्ट्रिक वेरियेंट्स पर ज्यादा ध्यान दें जो आने वाले समय में काफी प्रभावी रहेंगे.

ये बात तो वैसे भी स्पष्ट हो चुकी है कि पेट्रोल हाइब्रिड powertrain फ्यूल एफिशियेंट तो है ही साथ ही गवर्नमेंट द्वारा घोषित FAME-II scheme(Faster Adoption and Manufacture of hybrid and Electric vehicles) द्वारा सब्सिडी मिलना तो जैसे सोने पर सुहागा है. खुद गवर्नमेंट ने घोषणा की है कि 2028 तक CNG distribution infrastructure को विकसित करते हुए 10k CNG stations निर्मित हो जायेंगे. इसलिए डीजल इंजन पर निर्भरता खत्म करके वक्त से साथ चलते हुए CNG वेरियेंट्स पर काम करना ही बुद्धिमानी है.

दूसरे OEMs भी जल्द ही इस राह पर चल निकलेंगे पर फिलहाल Maruti जैसे दिग्गज द्वारा इस तरह का निर्णय लेना भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट के विकसित होने की आशा को बल दे रहा है.